अलगाववाद फैलाना व्यक्तिगत सवारथ ही हो सकता है – सुरिंदर सिंह

dnruleफिरकाप्रसती कभी किसी समुदाय अथवा राज्य की समृद्धि में योगदान नहीं दे पाती। अलगाववाद फैलाना व्यक्तिगत सवारथ ही हो सकता है, क्युंकि अलगाववाद का रास्ता किसी भी वर्ग को समृद्धि के दरवाजे तक नहीं ले जाता. पंजाब के काले दिनों के पश्चात अगर आज कोई पंजाब को फिरकू राज्य घोशित करता है, तो यह सरासर पंजाब की धरती से नाइंसाफी है, क्युंकि पंजाब के मेहनती लोग ऐसा तंज बर्दाश्त नहीं करेंगे, क्युंकि यह वह लोग है, जिन्होंने 1947 से ले कर मौजूदा समय तक फिरकूप्रसत-दंगाकारी लोगों से अपने राज्य अथवा आस-पड़ोस के गैरमज़हबी परिवारों को अपनी जान पर खेल कर अपने घरों में शरण दी थी. इस जज़्बे वाले लोग पंजाब में दोबारा दहिशतगरदी का माहौल नहीं चाहते। अपने सवारथ को चमकाने के लिए विदेशों में बैठीं गरम खयाली जथेबंदी लगातार कोशिशों में लगीं हैं, पर अब उस 84 वाली बात नहीं। पंजाब के युवक पढ़े लिखे हैं, वह ऐसे फिरकू संदेशों में समय बरबाद करने की के स्थान पर वरिष्ठ सीख प्राप्त कर बड़े पदों पर पहुँचने के लक्ष्य को साकार करने में लगे हैं। जिस तेजी से पंजाब तरक्की के रास्ते पर बढ़ रहा है, यह पंजाब आवासियों के लिए सराहनीय है। पंजाब रैवीन्यू में भारत के कई राज्यों से आगे निकल चुका है। अमृतसर के मूल निवासी सुरिंदर सिंह ने स्पष्ट किया कि, विदेशों से पंजाब के बारे में जो मनगढ़त प्रचार किया जा रहा है, वह सरासर गलत है। उन्होंने कहा कि, पंजाब एक सूबा ही नहीं, बलकि पंजाब अपने आप में एक समुदाय और धर्म है। जो कि प्यार और मिलन में विश्वास रखता है। पंजाबियों ने बहुत बुरा समय देखा है, किन्तु कभी डोले नहीं। हर बार अमन-शांति कायम कर पंजाब समृद्धि की तरफ़ बढ़ा है. सुरिंदर सिंह ने स्पष्ट किया कि, पड़ोसी देश, पंजाब की तरक्की से जलते हैं, जिस कारन पंजाब की शांति को तोड़ने के लिए नई नई तरकीब ढूंढ़ते रहतें हैं। उन्होंने कहा कि, पंजाब आरगैनिक कृषि को प्राथमिकता दे रहा है। किसान जागरूक हो रहा है। बहुत जलद आने वाला वर्षों में पंजाब आरगैनिक कृषि में विश्व के नक्शे पर मुख्य धारा में उबर कर आएगा। जिन की ओर से पंजाब के ख़िलाफ़ गलत प्रचार किया जा रहा है, उन की प्रवाह किये बिना पंजाबी अपने परिश्रम सदका तरक्की की तरफ़ बढ़ रहा है। पंजाब हमेशां उन्नति की राह पर रहेगा।

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