कैनेडा का अलगाववाद और हिंसा में विश्वास नहीं

tudoकैनेडीअन प्रधान मंत्री जसटिन टूडो की भारत यात्रा जितनी कैनेडीअन भारतीयों के लिए महत्वपूर्ण समझी जा रही थी, उतना ही भारतीय लोगों को भी अतिथि के सत्कार का मोह था, पर यह घटनाक्रम जिस तरीक़े से बदला, उस के कई कारण स्पष्ट हो कर सामने आये। दिल्ली में कैनेडीअन दूतावास की ओर से कैनेडीअन प्रधान मंत्री के स्वागत के लिए रातरी भोज का प्रबंध किया गया था। जिस में भाग लेने के लिए अतिथियों की लम्बी सूची तैयार की गई. यह सूची असल में भारत सरकार की नराजगी का एक कारण समझी जाती है, क्युंकि इस सूची में सम्मिलित किये जसपाल सिंह अटवाल का नाम इतराजयोग समझा गया, क्युंकि अटवाल की ओर से अकाली लीडर और भूतपूर्व सपीकर मलकीयत सिंह सिध्धू पर कैनेडा में जानलेवा आक्रमण किया गया था। जिस में जसपाल सिंह अटवाल के तीन और साथी जसबीर सिंह अटवाल, अमरजीत सिंह ढींढसा, सुखदयाल सिंह गिल्ल समेत फरवरी 1987 में गृफ़तार किए और इन को 20 वर्ष की सजा सुनाई गई. सितम्बर 1987 में इस केस में बड़ा बदलाव उस समय आया जब कैनेडीअन संरक्षण एजेंसी की ओर से इकट्ठे किये गये सबूतों को वकील माईकल कोड की ओर से गलत सिद्ध कर दिया गया। 1986 में बब्बर खालसा की ओर से एअर इंडिया में बम विस्फोट कर 300 के क़रीब गैर पंजाबी भारतीयों की जान ली गयी थी, इस सबंधी केस भी बब्बर खालसा के पक्ष में माईकल कोड की ओर से लड़ा गया था। एअर इंडिया बम विस्फोट में और मलकीयत सिंह पर कातलाना आक्रमण से भारतीय तंत्र संतुष्ट नहीं था, जो कि कैनेडा से नाराजगी का एक बड़ा कारण समझ आता है। जब कि जसपाल सिंह अटवाल की मौजूदगी की नराजगी का खदशा कैनेडीअन प्रधान मंत्री को हुआ तो उन्होंने तुरंत सपशटीकरन देते हुए खुलासा किया कि, इतराजयोग नाम सूची में से निकाले जाएँगे।इसके बावजूद कैनेडीअन मीडिया की ओर से मुंबई में रिसैपशन के दौरान कैनेडीअन प्रधान मंत्री की पतनी सोफिया टूडो से जसपाल सिंह अटवाल के फ़ोटो जारी किए गये, जबकि अटवाल की ओर से स्पष्ट किया गया कि वह कैनेडीअन सरकार के डैलीगेशन का हिस्सा नहीं है, बलकि वह व्यापार के लिए भारत आया है। उपरोक्त संपूर्ण घटनाक्रम के चलते मीडिया की ओर से टूडो को खालिसतानी बना कर पेश किया गया, जबकि टूडो की भारत फेरी निज्जी थी और सरकारी रूप पर टूडो की भेंट प्रधान मंत्री मोदी से पहले ही तय थी, पर इसके बावजूद कई तरह की अफवाहें फैलाईं जा रही थी. तय नीती के अनुसार 23 फरवरी 2018 को कैनेडीअन प्रधान मंत्री का राष्ट्रपति भवन में भरवां स्वागत किया गया। इंडिया के प्रधान मंत्री नरेंदर मोदी और कैनेडीअन प्रधान मंत्री जसटिन टूडो के बीच में कई तरह के समझौतों का अदान प्रदान हुआ। कैनेडा और भारत के सम्बन्धों को मजबूत करने के लिए दोनों देशों के प्रतिनिधिओं की ओर से गठबन्धन और निवेश पर जोर दिया गया। 58000 से अधिक रोजगार के मार्ग खुलेंगे। इस के इलावा कैनेडीअन प्रधान मंत्री ने टाटा सनज़ के नटराजन चंद्रशेखरन, इनफोसिस के सलीम पारेख, महिंदरा गरुप्प के आनंद महिंदरा, जे बीज गरुप्प के हरि भारतीआ, बिरला गरुप्प के कुमार मंगलम बिरला, ऐस्स पी गरुप्प के साईरस मिस्तरी से भी विशिष्ट भेंट की। कैनेडीअन प्रधान मंत्री अपनी पंजाब फेरी दौरान श्री हरिमंदर साहब में नतमसतक हुए। उन्होंने पंजाब के मुख्य मंत्री कैपटन अमरिंदर सिंह से अपने मंत्री मंडल समेत भेंट की। एजेंसियों के विवरणिकों के मुताबिक प्रधान मंत्री टूडो बीते वर्ष खालिसतानी पलैटफारम से संबोधन करते देखे गए थे, जो कि भारतीय तंत्र के लिए दुखदायक है, क्युंकि भारत अलगाववाद की नीती पर नियंत्रण पाने में जुटा है, जबकि विदेशी धरती से अलगाववाद की बात करने वाले पंजाब के माहौल को दोबारा काले दिनों की तरफ़ ले जाने के रास्ते पर चल रहे हैं, जो कि पंजाब के लोगों को नागवारा है। कैनेडीअन प्रधान मंत्री टूडो की ओर से कैपटन से भेंट के दौरान भारतीय अखंडता का सम्मान किया गया। उन्होंने स्पष्ट किया कि कैनेडा अलगाववाद और हिंसा में विश्वास नहीं रखता और यह कैनेडा की असल ताक़त भी है।