गुरुद्वारे के नाम पर रोक, धार्मिक संस्थानों को अपमानित करने की कोशिश – सेखों

banयू के की एक सिख समाज सेवी संस्थान की ओर से जो उन 70 गुरुद्वारा कमेटियों के सहयोग से चलती है, जिन की ओर से भारतीय डिपलोमैटस के गुरुद्वारों में प्रवेश पर रोक लगाई थी. इसका खुलासा तब हुआ जब शैंबरोक कौंसल के सिख कौंसलर की ओर से बैडफोर्ड गुरुद्वारे का नाम इस सूची में दरज करने पर एतराज़ जाहिर किया गया। यू के एक सिख संस्थान की ओर से प्रैस्स नोट जारी करते हुए खुलासा किया गया था, जिस तहत 70 गुरुद्वारों की कमेटियों की ओर से भारतीय दूतावास के कर्मचारियों पर सरकारी दौरा करने से गुरुद्वारे में प्रवेश पर ऐतिहासिक रोक लगाई थी. कौंसलर कँवल सिंह सेखों ने मीडिया में स्पष्ट किया कि, वह स्वयं सथानक गुरुद्वारा का कमेटी सदस्य होने के इलावा बैडफोर्ड गुरुद्वारा का स्थायी सदस्य है और उन की ओर से स्पष्ट किया गया कि, उन का गुरुद्वारा साहब में ऐसा कोई मता पास नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि, इस सबंधी उन्होंने इंग्लैंड के और गुरुद्वारों से संपर्क साधा और उन्होंने भी ऐसी किसी रोक पर सहमति होने सबंधी एतराज़ जाहिर किया। सेखों की ओर से खुलासा किया गया कि, इस सबंधी जब उन्होंने सथानक गुरुद्वारा कमेटी से भारतीय दूतावास के कर्मचारियों पर लगाई रोक सबंधी जानकारी लेने के लिए संपर्क किया तो उन का जुआब भी नांहपख्खी प्राप्त हुआ। इस के इलावा कमेटी की ओर से किसी भी ऐसी मीटिंग में शमूलीअत होने से इनकार किया गया। सेखों ने कहा कि, यह मुद्दा सथानक संसद सदस्य मुहम्मद यासीन, तनमनजीत ढेसी और प्रीत कौर से सांझा करेंगे, क्युंकि गुरुद्वारे के नाम पर बैन का बहाना लगा धार्मिक संस्थानों को अपमानित करने की कोशिश की गयी है। सेखों की ओर से इस प्रति अलग अलग रामगड़्हिया संस्थान, बैडफोर्ड, नारथहैमटन, मिलटनकेनस और कैंबरिज के गुरुद्वारों से भी संपर्क साधा। सेखों की ओर से इस सबंधी डा: रमिंदर सिंह रंगेर चेअरमैन बृटिश सिख ऐसोसीएशन को पत्र के द्वारा जानकारी भेजी। जिस में उन सिख गुरुओं की सीख और क़ुरबानी का जिक्र करते हुए भारत के लिए सिखों के योगदान की बात को केन्द्रित कर गुरुद्वारा साहब की ओर से लगाई ऐसी रोक का स्पष्ट उत्तर भी माँगा।