छोटी सी उम्र में बड़ी प्राप्तियाँ करने वाले अर्शदीप सिंह

अपने बच्चों को फिरकाप्रसती की सीख देने वाले संस्थान और स्रोतों से दूर रखें

 

arsh1 arshपंजाब की आबो हवा में कहीं आस पास भी खालिसतान की लहर नजर नहीं आती। खालिसतान के मुद्दे को पंजाब में प्रापोगंडा बना कर पेश किया जा रहा है। पंजाब का युवक शिक्षिक हो चुका हैं और बच्चों की रुच्ची अधिक ज्ञान प्राप्त करने और कई और रुचिकर कार्यों में है। मौजूदा पीढ़ी बीते समय को याद कर अपने भविष्य के लक्ष्य को खोना नहीं चाहते. पंजाब में आतंकवाद के दिन खत्म हो चुकें हैं और पंजाब राज्य फिर से समृद्धि की राह पर है। यह सिद्ध कर दिखाया है छोटी सी उम्र में बड़ी प्राप्तियाँ करने वाले अर्शदीप सिंह ने। मेरी दादी मुझे कहती रहती है कि मेरी फ़ोटो खींचो, किन्तु मैं अपनी दादी की फ़ोटो नहीं खींचता. यह कहना है दुनिआ भर में मशहूर हुए छोटे फोटोग्राफर अर्शदीप सिंह का।
उस को हाल ही में ‘वरलड लाईव फोटोग्राफर आफ दि ईअर’ से सम्मानित किया गया है। जालंधर के मॉडल टाऊन में रहते हुए अर्शदीप अपनी दादी के बार बार कहने पर भी फ़ोटो नहीं खींचते। वह अपनी दादी को बताते हैं कि इस कैमरे से मनुष्यों की नहीं सिर्फ जानवरों और पक्षियों की फ़ोटो खींची जाती हैं।
10 साल के अर्शदीप का कहना था कि वह अपने पिता के इलावा किसी और की फ़ोटो नहीं खींचेगा और न ही कभी फ़ोटो खींचने के पैसे लेगा। कपूर्थला में एक मोटर की पाईप में घुसे दो उल्लुओं की फ़ोटो खींच कर दुनिया भर में मशहूर हुए अर्शदीप का कहना है कि उस को फ़ोटो खींचने से यह पता चल गया था कि यह फ़ोटो उस को ऐवारड दिला सकती है। अर्शदीप वरलड लाईव फोटोग्राफर बनना चाहता है। उस की इच्छा है कि वह बरड आफ पैराडाईज़ देखे। पंजाब की अजाद आबो हवा में सांस ले रहे अर्शदीप ने बताया कि, वह फोटोग्राफी के साथ साथ पढ़ाई भी अच्छी तरह करते हैं और अच्छे नंबर लेते हैं। साइंस उसका पसंदीदा विषय है, किन्तु विज्ञानी बनने की उसकी कोई चाहत नहीं है। मन में एक ही बात धारण की हुई है कि वरलड लाईफ़ फोटोग्राफर ही बनेगा।
उसने बताया कि, पापा ने कभी भी न शिक्षण के बारे और न ही फोटोग्राफी के बारे में कोई दबाव डाला, सिर्फ यह ही कहते हैं जो करना वह मन लगा कर करो. अपने पाँचवे जन्म दिन के मौक़े मिले छोटे कैमरे से उस ने जो पहली फ़ोटो खींची थी वह एक पक्षी की थी. उस समय उस को कैमरों के लैंज़ के बारे रत्ती भर भी जानकारी नहीं थी. अब शौक ने उस की जानकारी में काफ़ी वृद्धि की है। जब उस ने लैपरड की फ़ोटो खींची थी तो उस को लगा था कि वह जंगली जीवों की भी फ़ोटो खींचेगा। फोटोग्राफी करना, कैमरों और लैंज़ की जानकारी का जुनून अर्शदीप को इतना है कि उस को अपने कद के समान लैंज़ वाले कैमरे की कीमत भी नहीं पता थी. उस के पिता रमनदीप सिंह का कहना है कि वह सिवाए फोटोग्राफी के और किसी भी बात पर ध्यान नहीं देते। अर्शदीप भी अर्जुन के माफ़िक अपना लक्ष्य कैमरे के द्वारा पक्षियों की आँख पर ही रखता है। उस को नेचर बैसट फोटोग्राफी एशिया जूनीअर ऐवारड भी मिल चुका है।
असल में पंजाब के लोग शांति चाहते हैं, कोई भी पंजाब के अन्दर बुरे दिनों की वापसी नहीं चाहता। पंजाब की अवाम अपनी आज़ादी को गँवाना नहीं चाहती। पंजाब का हर व्यक्ति प्रोन्नत और डर रहित माहौल में जीना चाहता है, जहाँ उन के बच्चों का भविष्य सुरक्षित रह पाये। पंजाबी होना के नाते हम सब का फ़र्ज़ बनता है कि हम अपने बच्चों को फिरकाप्रसती की सीख देने वाले संस्थान और स्रोतों से दूर रखें और अपने बच्चों को अजाद आबो हवा में जीने का अधिकार देते हुए अपनी तरक्की के मार्गों को चुनने का मौक़ा दें.