श्रेष्ठ आचरण ही बड़प्पन की कसोटी है

बठिंडा विकास मंच द्वारा पैसा नहीं श्रेष्ठ आचरण ही बड़प्पन की कसोटी है विषय पर विचार गोष्टी

शिव मंदिर स्ट्रीट में आयोजित की गई। बठिंडा विकास मंच प्रधान राकेश नरूला ने विचार चर्चा प्रारभ करते हुए कहा पैसा सभी को चाहिए पैसे की आवश्यकता सभी स्वीकारते है। जीवनयापन में पैसा एक साधन की तरह प्रयोग होना चाहिए वह परम लक्ष्य नहीं बनना चाहिए। हमें अपनी आवश्यकताएं सीमित रखनी चाहिए, निर्वाह और उन्नति के मार्ग पर  चलते हुए जितने के बगैर काम न चलता हो उतना ही संचय करना चाहिए। जिंदगी भर के लिए आज ही जमा कर लेने की योजना मत बनांए, ईश्वर के राज्य में ऐसी समुचित व्यवस्था है कि हमें यथासमय सभी कुछ मिलता रहेगा। राजिद्रं चावला ने कहा नियम व्यवस्था द्वारा जीविका कमा लेने के बाद अपने मस्तिषक को दूसरी तरफ लगाएं। ज्ञान का संचय करे। आत्मा को उंचा उठाने की साधना करें। परमार्थ में लगे। राधे श्याम बांसल ने कहा हमें मनुष्य की महत्ता उसकी आत्मिक संपत्ति के अनुसार, ज्ञान के अनुसार, विचार तथा कार्यो के अनुसार नापनी चाहिए। कोई व्यक्ति अधिक पैसे वाला है। केवल उसी कारण उसके प्रंशसक व सहायक मत बनें, निर्धन गुणवानों की सतयुग में मान्यता थी, पैसा न होना कोई आयोग्यता न थी। सेवा राम सिंगला ने कहा कि हम प्राचीन राजमार्ग की और बगैर चलें पैसे की अपेक्षा श्रेष्ठ आचरण को बड़प्पन की कसौटी बनाएं बचा हुआ समय उन कामों में लगाएं जो भीतरी उल्लास को प्रोत्साहन देतें हैं। जो लोक तथा परलोक को उज्जवल बनातें है।