स्वास्थय संतुलित रखना है तो अपनाए पांच सूत्र

बठिंडा विकास मंच द्वारा स्वास्थ संतुलित रखना है तो अपनाए पंाच सूत्र अपनाएं

विषय पर विचार गोष्ठी शिव मंदिर स्ट्रीट में आयोजित की गई। बठिंडा विकास मंच प्रधान राकेश नरूला ने कहा रोग ग्रस्त होना व्यक्ति की स्वंय  की गल्त आदतों का परिणाम है अपनी जीवन चर्चा का अस्त-व्यस्त होना ही बीमारियों को बुलाने का खुला निमंत्रण है। यदि हम आहार, निद्रा, श्रम स्वच्छता और प्रसन्नता इन पांचो सूत्रों को मजबूती ो थामें रखें तो हमारा स्वास्थय लडख़डाएगा नहीं। राजिद्रं चावला ने कहा कि आहार  शास्त्र को पढऩे या माहिरों से परामर्श की जरूरत नही है। अपने क्षेत्र में पैदा होने वाले सुपाच्य अनाज, फल, दुध और शाक से अच्छी प्रकार काम चलाया जा सकता है। हमें हमेशा भूख से कम ही खाना चाहिए, पेट को पानी व हवा के लिए खाली रखा जाना चाहिए। सेवा राम सिंगला ने कहा हम यदि कम पकाए, कम मिर्च-मसाले वाले खाद्य पदार्थों का सेवन करें तो तंदरूस्त रहतें है। शाम कुमार शर्मा ने कहा स्वच्छता भी हमारे स्वास्थय के लिए अति जरूरी है। दिन भर में कम से कम पद्रंह गिलास पानी अवश्य परने चाहिए। जहां पानी की शुद्धता का संदेश हो उसे उबालकर या छान कर पींए। एस.एल लाटका ने कहा श्रम भी संतुलित स्वास्थय के लिए जरूरी है।शरीरिक श्रम से प्रत्येक तत्व को गति प्राप्त होती है व जकडऩ दूर होती है। काम व श्रम से जी चुराने वालों की गाड़ी हमेशा कीख्ड़ में धंसी रहती है। परिश्रमी व्यक्ति दीर्घ जीवी व निरोग होतें है। ईज. इद्रंजीत गुप्ता ने कहा  प्रसंन्न् रहने से शरीर का प्रत्येक कण संजीवता अनुभव करता है। इससे मन भी हल्का रहता है और चेहरे का सौंदर्य बढ़ता है। राधे श्याम बांसल ने कहा  प्रत्येक व्यक्ति में जीवन शक्ति विद्यमान रहती है परंतु हम अपनी गल्त खान-पान की आदतों व जीवन चर्चा के अस्त-व्यस्त होने के कारण स्वंय बीमारियों को बुलावा देतें है। यदि हम आहार, निद्रा,स्वच्छता,श्रम और प्रसन्नता इन पाचों सूत्रों को मजबूती से थामें रों तो हमारा स्वास्थय कभी भी लडख़ड़ाएगा नही।