पंजाब की नयी पीढ़ी सीख पक्ष से बहुत ही बुद्धिमान और सक्रिय

punपंजाब में समृद्धि का दौर ऐसे लौटा है जैसे काले बादलों के छटने के पश्चात सूर्य की किरणें रोशनी बिखेरती हैं. आज पंजाब का किसान बुद्धिमान नजर आता है, क्युंकि किरसानी में आने वाली नयी पीढ़ी सीख पक्ष से बहुत ही बुद्धिमान और सक्रिय है। एक समय था जब किसान अपने खेतों में जाने से डरता था, अथवा दिन छिपने से पहले घर को लौटने का सोचता था। फसलों की रोपाई भी इन मसलों को मुख्य रख कर की जाती थी. पंजाब के कई क्षेत्रों में कमाद की बिजाई पर इस वजह से पाबंदी थी, क्युंकि घने कमाद का लाभ ले शरारती अनसर वारदातों को अंजाम देते थे, पर आज खेमकरन जैसे इलाके जहाँ सख्त दुपहिर गुजारना मुश्किल था, वहां किसान अवतार सिंह अपनी आधुनिक कृषि का विवरण देते बताते हैं कि अब यह इलाका पहले के माफ़िक नहीं रहा। घनी बसावट और खेतीबाड़ी के अलावा डेयरी फारमिंग का काम इस हलक़े में जोर पर है। वह बताते हैं कि एक समय था जब खेमकरन हलक़े के डेरों में रहने वाले लोग दूर शहरों में जा बसे थे। इन इलाकों में लोग दोबारा बसेरा कर चुके हैं और पंजाब का किसान ही नहीं वरन् प्रवासी मज़दूर भी बेखौफ हो पंजाबी किसानों का हाथ बंटाता है. अवतार सिंह का मानना है कि, जो लोग बीते कई दशकों से पंजाब की तरफ़ नहीं लौटे, उन को एक बार पंजाब की आबो हवा में जरूर आना चाहए। जिस से उन को आज के पंजाब और 80 से 1990 के पंजाब फरक समझ आ पाये। मेहनती लोग पंजाब की धरती में भी बढ़िया व्यापार करते हैं। पंजाब अब वह पंजाब नहीं जिस को काले अँधेरे के माफ़िक देखा जाता था, बलकि अब का पंजाब अधिक शांतमई और अवाम को समर्पित है।