पंजाब के आम लोग, दहिशतगरदी की मूवमैंट को नाकार चुके हैं

peaceपंजाब, भारत का सब से अधिक अनाज पैदा करने वाला प्रांत है। पंजाब का जज़्बा, परिश्रम, व्यवसाय, किरसानी और पंजाब का नायक कृषक। अगर पंजाब के विषय में सोचा जाये तो यह चीजें सामने आतीं हैं, क्युंकि पंजाब, भारत का सिरमौर सूबा किरसानी की अथक परिश्रम की वजह से बना है। एक समय था जब भारत में अपनी जरूरत के अनाज की भरपाई विदेशों से पूरी की जाती थी, किन्तु आज पंजाब के किसान ने अनाज की भरपाई इस कद्र पूरी की कि पंजाब, भारत में अनाज की कमी को पूरा ही नहीं करता वरन् बड़ी मात्रा में दूसरे मुल्कों को अनाज निरयात किया जाता है। पंजाब, भारत का सब से प्रोन्नत और तरक्की पसंद राज्यों में से एक है। पंजाब में हरी क्रांति से पश्चात पंजाब ने उद्योग के प्रसार में भी तरक़्क़ी की. आज पंजाब में कृषि से सम्बन्धित औजार बनाने के लिए कई बड़े उद्योग सक्रिय है, जिस कारन कृषि आधुनिकता की तरफ़ बढ़ रही है। समय समय पर सरकार की ओर से बनाईं नीतिओं ने किसान को हरी क्रांति लाने में बड़ा योगदान दिया. पंजाब के किसान मस्सा सिंह के अनुसार, आज का किसान सिर्फ पुराने फसली चक्कर पर निरभर नहीं वरन् पढ़े लिखे युवकों के किसानी में डाले जा रहे योगदान से खेतीबाड़ी पर नये प्रयोग किये जा रहे हैं। कई तरह की सब्ज़ी और फलों की कृषि के इलावा पंजाब का किसान पशु पालन, पोलटरी और मछली पालन इत्यादि में अग्रगामी है। जिस में सरकार की नीती मुख्य रूप पर योगदान दे रही है। आज का किसान अगर प्रोन्नत नजर आ रहा है तो वह इस के लिए कि उस की ओर से किये गए अथक परिश्रम नये अनुबंध ले कर आई है। यह किसान पंजाब के दहिशतगरदी के बुरे दिनों में बहुत ही मुसीबतें भरे माहौल से निकला है, क्युंकि देर रात खेतों में काम करना मुश्किल हो गया था। शाम के पाँच बजे के पश्चात लोग घरों में अपने आप को बंद कर लेते थे, पर वह काले बादल अब छट चुके हैं। पंजाब के बच्चे बच्चे की ओर से दहिशतगरदी की लहर को नकारा गया। जिसके चलते हर आम मजदूर का जीवन भी मुश्किलें भरा ही नहीं, वरन् सहिम में बीतता था। आज पंजाब का किसान उस बुरे समय की जंजीरों में निकल चुका है और तरक्की के मार्ग पर चल रहा है। पंजाब आज मुख्य धारा में वापस आ गया है और विदेशी ताक़तें जितना भी जोर लगा लें, किन्तु पंजाब के आम लोग भी उस दहिशतगरदी की मूवमैंट को नाकार चुके हैं।

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