पंजाब के लोग शांति चाहते हैं

punjabखालिसतान के मुद्दे को पंजाब में प्रापोगंडा बना कर पेश किया जा रहा है, जबकि पंजाब की आबो हवा में कहीं आस पास भी खालिसतान की लहर नजर नहीं आती। इन विचारों की अभिव्यक्ति विशाल सोच वाले भूतपूर्व फौजी दविंदर सिंह ने स्पष्ट करते हुए की. पंजाब जिस काले दौर में गुजरा है, उस में सुबह को घर से निकला व्यक्ति शाम को घर लौटेगा, यह कहना मुश्किल होता था, पर अब समय बदल चुका है। पंजाब का युवक शिक्षक हो चुका हैं और बच्चों की दिलचस्पी ज़्यदातर अधिक शिक्षा प्राप्त करने में है। मौजूदा पीढ़ी बीते समय को याद कर अपने भविष्य के लक्ष्य को खोना नहीं चाहती। पंजाब में आतंकवाद के दिन खत्म हो चुके हैं और पंजाब राज्य दोबारा समृद्धि के रास्ते पर है। उन्होंने पारस्परिक सम्बन्धों की वरिष्ठ मिसाल देते हुए कहा कि, किसी भी गांव पिंडों में जबरदस्ती सियासी पार्टियों से जोड़ने का माहौल खत्म हो चुका है। पंजाब के अन्दर सरपंची के वोट शांतमई ढंग से होते हैं। अत्यधिकता में पंजाब के गांवों के अन्दर ग्राम-प्रधान का चयन सरबसंमती से होने लगा है। असल में पंजाब के लोग शांति चाहते हैं, कोई भी पंजाब के अन्दर बुरे दिनों की वापसी नहीं चाहता। पंजाब की अवाम अपनी आज़ादी को गँवाना नहीं चाहती। पंजाब का हर व्यक्ति प्रोन्नत और डर रहित माहौल में जीना चाहता है, जहाँ उन के बच्चों का भविष्य सुरक्षित रह पाये। दविंदर सिंह के अनुसार 1984 के दौरान भी उन के गांव की गलियों में खालिसतान की बात कोई नहीं करता था, किन्तु दहशत का माहौल जरूर था, न ही उन के गांव में खालिसतान के समर्थन में कभी नाहरे लगे और न इस सबंध में कोई रैली हुई, क्युंकि पंजाब के लोग शांति चाहते थे। खासकर सिख भाईचारा पंजाब में कभी भी खराब माहौल नहीं चाहता, 99 % पंजाबी अपने बच्चों के भविष्य के लिए किसी भी तरह का समझौता नहीं करेंगे। कोई भी अपने बच्चों के अधिकार में विदेशी ताक़तें और गैरसमाजी दलों को हावी होने देगा। दविंदर सिंह के गांव में कई सदियों से ब्रह्मणों का परिवार बसे हुए हैं, जो कि समूह गांव वासियों के भाईचारे का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि, समय बदल चुका है, अब कोई वर्णभेद और धर्म में जुदाई की बात नहीं करता। खालिसतान को प्रापोगंडा करने के लिए बरता जा रहा। अपने आत्मगत सवारथ, हित्त की भरपाई अथवा आर्थिक स्थिति को ऊँचा उठाने के लिए लालचवस्स अलगावाद की बंसरी बजाने के लिए मजबूर किया जा रहा है, जबकि माहौल में ऐसी कोई सरगर्मी नहीं।