पंजाब के लोग सदा तरक्की के मार्ग पर चलने का लिए तत्पर

punjabहमेशां सरबत्त का भला माँगने वाले पंजाब के लोग सदा तरक्की के मार्ग पर चलने का लिए तत्पर रहे हैं। आज जहाँ लोग सुख शांति और अमन की हवा में श्वास ले रहे हैं, वहां ही कुछ राजनीतक और धार्मिक संगठन पंजाब को लगातार अप्रतिष्ठित करने का कोई भी मौक़ा हाथ से जाना नहीं देते। इन का मुख्य लक्ष्य पंजाब की आबो हवा में प्रापोगंडे को फैलाना है। इस घटिया स्तर की राजनीति, जिसका सपाट रूप पर नुकसान आम लोगों को भुगतना पड़े, प्रति अपने विचार पेश करते हुए प्रख्यात समाज सेवक प्रो: गुरविंदर सिंह ममणके ने खुल कर बोलते हुए कहा कि, पंजाब के लोग असल में सदभावना की तरक्की चाहते हैं, ना कि फिरकूप्रसती विचारधारा को प्रसारित करने का मौक़ा बाहरी शक्तियों को देना। उन्होंने कहा कि, खालिसतान, पंजाब और पंजाबीअत की माँग नहीं, बल्कि फिरकू सोच से पैदा हुआ एक काला संदेशा है, जो पंजाब के भाईचारे को ढाह लगाने की कोशिश कर रहा है। आज पंजाब के लोग पंजाब में तरक्की देखना चाहते हैं, जो कि फिरकूवाद का साथ देने से संभव नहीं। इन तथ्यों से आज पंजाबी सूचित हो चुका हैं। हिंसा से प्रजातंत्र को नुकसान झेलना पड़ता है। हिंसा किसी भी तरीक़े से आम लोगों के लिए सहायक सिद्ध नहीं हो पाता। पंजाब के लोगों को अहसास है कि हिंसा के मार्ग पर चलने से पंजाब की तरक्की को ढाह लगेगा। पंजाबियों के सपने चकनाचूर हो जाएँगे और पंजाब के लोगों का जनजीवन अभिभूत ही नहीं, बल्कि रुक जायेगा. सियासी और आत्मगत सवारथ की भरपाई के लिए छोटी छोटी जथेबंदीओं में बंटे विदेशों में बैठे पंजाब को अपनी थाप पर चलाने वाले आज के पंजाब की तरक्की से कोसों दूर हैं. ऐसे संस्थानों की ओर से पंजाब की तरक्की में योगदान डालने की जगह पंजाबीअत की विचारधारा को फिरकूप्रसती का घुण लगा रहा है. वर्षों में इन से पंजाब के बारे में कोई वैध निर्णय नहीं लिया गया और जितनी बार भी पंजाब की बात चलती है, उतनी बार फिरकू दस्तों ने पंजाब की धरती पर अलगाववाद का बीज बोने की कोशिश जरूर की है, पर अथक पंजाब के अवाम की ओर से हर बार इन को मूंहतोड़ जुआब दिया गया। फिरकूवाद के कारण बीते समय दौरान पंजाब को कई बार बड़ा नुकसान हो चुका है और पंजाबी अब वह गलती दोबारा दुहराना नहीं चाहते। पंजाब की अमन शांति पर नजायज प्रापोगंडा सरासर गलत है, क्युंकि पंजाब वह सूबा है, जिस को संपूर्ण दुनिया अन्नदाता मानती है। पंजाब की धरती ने योद्धा, सूरमे और शूरवीरों को जन्म दिया है, जिन्होंने अहिमद शाह अबदाली से ले कर हिंदुस्तान की आज़ादी तक असंख्य क़ुरबानियाँ, मानवी अधिकारों की रक्षा और सदभावना बरकरार रखने के लिए दीं हैं। सरबत्त का भला माँगने वाली कौम फिरकूवाद को मूंहतोड़ जुआब देने का लिए तत्पर है। अब अगर किसी चीज की जरूरत है तो वह है पंजाब के युवकों का आगे आना। जिस से वह अपने अधिकारों और पंजाब की समृद्धि के निमित्त फिरकाप्रसती को मूंहतोड़ जुआब दे पाएं.

नोट : किसी भी व्यक्ति विशेश के ब्यान अथवा विचारों से संपादक की सहमति होनी जरूरी नहीं.