भारत सरकार की ओर से अफगानी सिख और हिंदू परिवारों को बिना रोक टोक, असीमत भारत का वीजा प्रदान

hsikhsअफगानिस्तान में घटी मंदभागी घटना ने सिखों का ही दिल नहीं दुखी किआ बल्कि समूह भारत वासियों में शोक की लहर देखने को मिली। जिकरयोग है कि अफगानिस्तान में 1990 के दौरान अंदाजन ढाई लाख सिख और हिंदू बसेरा करते थे, किन्तु ग्रह युद्ध छिड़ने के पश्चात एक एक कर कर हिंदू सिखों की गिनती घटती गई, जो कि अंदाजन 300 परिवारों तक सीमत हो कर रह गयी है। सिखों पर हुए आक्रमण की जिंमेवारी आतंकवादी संगठन इसलामक सटेट गरुप्प की ओर से ली गई. जिकरयोग है कि यह गरुप्प तालिबानी दल से जुड़ा हुआ है और तालिबानी संगठन को पाकिस्तान इंटैलीजयंस आई ऐस आई के समर्थन से अस्वीकार नहीं किया जा सकता। सपाट अथवा अप्रत्यक्ष तरीक़े से खोजा जाये तो स्पष्ट होता है कि अफगानिस्तान में कम गिनती की कक्षा में हिंदू और सिख परिवार आते हैं, जिन को लक्ष्य बनाने का इशारा आई ऐस आई की ओर से तालिबानी संगठन के माध्यम से इसलामक सटेट गरुप्प को दिया जाता है। इस से पहले भी अंदाजन 7 भारतीय इंजीनियर मई महीने के दौरान अगवा किये गए थे, जो अफगानिस्तान में भारत अफगानी समझौते तहत विकासशील प्रॉजेक्टों पर सहयोग देने का लिए भेजे गए थे। पाकिस्तानी तालिबान कम गिनती हिंदू और सिखों को लक्ष्य बनाने के इलावा इन से बेहद बुरा व्यवहार करते हैं। कम गिनती को अपनी भुजा पर पीला कपड़ा बाँध कर रखने की हदायत दी जाती है, जिस से सम्मेलन में उन की पहचान हो सके। इस संपूर्ण घटनाक्रम के भारत के प्रधान मंत्री की ओर से कड़े शब्दों में निंदा की गई और उन्होंने अफगानिस्तान को भरोसा दिलाया कि वह हर मुसीबत की घड़ी में अफगानी सरकार का साथ देंगे। उन्होंने इस आक्रमण को अफगानिस्तान की बहुसंसकृती पर आक्रमण बताया। अफगानिस्तान में नियुक्त भारतीय राजदून विने कुमार की ओर से पीड़ित परिवारों से भेंट करने के इलावा हादसे का शिकार हुए सिख लीडरों के अन्तिम संस्कार में पूर्ण योगदान डाला गया. भारत सरकार की ओर से अफगानी सिख और हिंदू परिवारों को बिना रोक टोक और असीमत भारत का वीजा प्रदान करवाया गया है, किन्तु इसके बावजूद कई सिख परिवार, जो अफगानिस्तान को अपना घर मानते हैं, वह मोह के तार छोड़ कर जाने के लिए तैयार नहीं है। भारत सरकार की ओर से पीड़ित परिवारों को हर तरह की सहायता प्रदान करवाने का भरोसा प्रधान मंत्री की ओर से दिलाया गया।