विदेशी सरमायेदारों का कठपुत्तली का खेल अब नहीं चलेगा

punjabiपंजाब का युवक शौहरत और नाम के लिए गैंगसटर के मार्ग को चुन चुका था, जिस को बड़ा समर्थन विदेशों से अपनी आत्मगत दुशमणियां निकालने के लिए मोटी रकमों को बरता जा रहा था। अंडरवरलड के सुपारी का चलन बीते समय दौरान पंजाब में भी देखने को मिला। गुंमराह हुए युवकों को वापस लाना नामुमकिन जैसा लगता था, क्युंकि गुंमराह हुए युवकों के पास इस मार्ग पर चलने का कोई लक्ष्य नहीं, वरन् शौहरत और लोगों में दहशत का माहौल पैदा करना मुख्य कारण था। पंजाब पुलिस और राष्ट्रीय संरक्षण एजेंसियों के सांझा सहयोग से पंजाब के हालातों को गंभीरता से समझा गया। जिस उपरान्त अंदाजन 50 ऐसे युवकों की लिस्ट तैयार हुई, जो पंजाब में डर का व्यापार चला रहा थे। गुरप्रीत सिंह सेखों, गुरशहीद सिंह, सुख्खा काहलों, जसविंदर रौकी, प्रभजिंदर सिंह, भिंदा मुकतसर, जगदीप जग्गू इत्यादि कई नाम इस लिस्ट में सम्मिलित थे. जिन में कुछ एक दो युवक गुंडागरदी के इस मार्ग को छोड़ पाये, पर अधिक को सरमाएदारी की मार खा गई. पंजाब में लाहोरिआ ग्रुप और गौंडर गैंग मुख्य रूप पर सक्रिय था, किन्तु आम लोगों की विचारधारा जैसे जैसे बदली उस तरह ही पंजाब इस गुंडागरदी के माहौल से बाहर निकल रहा है। असल में अगर इस को और ध्यान से देखा जाये तो अनायास समझ आती है कि पंजाब में गुंमराह हुए कुछ अपराधिक सोच से जुड़े युवक विदेशों में बैठे गरमखयाली दलों के इलावा पारस्परिक रंजिशों को अपने अहंकार की बलि बनाने के लिए इन आम परिवारों से सम्बन्धित युवकों का खुल कर लाभ ले रहें हैं।
जिकरयोग है कि जब किसी लहर को आम लोगों का साथ न मिले अथवा लोग समर्थन न प्राप्त हो, तो उस लहर का नाकामयाब होना निशचत है। पंजाब भी इस दौर से निकल रहा है, जहां के लोग बीते समय के दौरान कई वर्षों तक दहशत का माहौल अपने ऊपर झेल चुके हैं। पंजाब का युवक अपनी तरक्की के मार्गों को छोड़ कर, उन कार्यों में नहीं उलझना चाहता, जिन की वागडोर विदेशों में बैठे सरमाएदार और उन क़ामयाब लोगों के हाथ में हो, जिन्होंने कभी पंजाब की धरती पर पैर रखना भी जरूरी नहीं समझा। अब इनके पीछे लग कर पंजाब का बुद्धिमान युवक अपनी जिंदगी से खिलवाड़ नहीं करेगा। बीते समय दौरान अगर गैंगसटर बने युवकों के प्रोफाईल को देखा जाये तो स्पष्ट होता है कि गैंगसटर बने आधे से ज्यादा युवक उच्च दर्जे के खिलाड़ी थे.
राजस्थान में पुलिस मुकाबले के दौरान अपने साथी समेत मारा गया विक्की गौंडर सटेट लैवल का उच्च दर्जे का खिलाड़ी था, किन्तु गलत हालातों के चलते गुंमराह हुए खिलाड़ी ने जुर्म की दुनिया का दामन पकड़ा, जिस के बदले विदेशों में बैठे हर वर्ग के पंजाबी युवक ने उसके किस्सों को बढ़ा चढ़ा कर ऐसा पेश करना शुरू किया कि गौंडर को लगने लगा कि, शायद यह उसके हित में है और वाहोवाही पाने के तहत उसका जुर्म करने का हौंसला बुलंद होता चला गया. आखिर में यह कहना गलत नहीं होगा कि विदेशी धरती पर बैठे कुछ सवारथी लोग पंजाब के जौशीले युवकों को सरमाये की चमक दिखा गुंमराह करने में लगे हैं। विदेशी सरमाएदार की ओर से चलाया गया कठपुत्तली का खेल अब अतीव देर नहीं चलेगा, क्युंकि सरकार और सथानक पुलिस के इलावा युवक भी अधिक जागरूक हो चुका हैं।

नोट : किसी भी व्यक्ति विशेश के ब्यान अथवा विचारों से संपादक की सहमति होनी जरूरी नहीं.