सोशल मीडिआ के ऊपर फैलाये जा रहे शैतानी छड़यंतर में बाहर निकलो

mouse trap with mobile phone. social media and  internet addictiआज सोशल मीडिया जिस कद्र लोगों के मस्तिष्क के ऊपर घर कर रहा है वह बहुत ही संजीदा ढंग से सोचने और विचारने वाला मसला है। पता नहीं क्यों आज लोगों को पृंट मीडिया अथवा इलैकट्रानिक मीडिया से अधिक सोशल मीडिआ के ऊपर ज़्यादा यकीन हो गया है। छोटी-छोटी घटना को भी सोशल मीडिआ में इस ढंग से पेश किया जा रहा है यानो दुनिया खत्म होने किनारे है, किन्तु जब उस घटना की हक़ीकत का पता चलता है तो सब अचंभित रह जातें हैं कि यह तो सब असत्य ही था, फिर सोचा जाता है कि यह ख़बर आई कहां से थी, किस ने भेजी, क्यों भेजी और कब भेजी ? इन सब बातों का फिर दुनिया में किसी के भी पास कोई जुआब नहीं होता। और तो और आज सोशल मीडिया सिर्फ़ गलत ख़बरें अथवा जानकारी ही नहीं प्रकाशित कर रहा, वरन् सोशल मीडिआ के ऊपर पोसट हो रहे गलत पोसट के कारण लोगों का समाज और देश के प्रति धारणा को भी गलत बनाया जा रहा है।
कुछ समाज और इंसानियत प्रतिद्वंदी ताक़तें गलत और अधूरी जानकारी सोशल मीडिआ में इस तरह परोस रहे हैं कि समझए हम तो सदियों से ही गुलाम है। इस ग़ुलामी से बचने के लिए हमें विभक्त धर्म ही की जरूरत नहीं वरन् विभक्त देश की भी जरूरत है, जिस के लिए सोशल मीडिआ के ऊपर कभी कोई कभी कोई मूवमैंट को भी अंजाम दिया जाता है और जिन लोगों को यह शैतानी खेल का पता चल जाता है, फिर उन को आविष्ट करके अपने से जोड़्हने के लिए तरह तरह के मनघड़त किस्से कहानियां बना सोशल मीडिआ के ऊपर पोसट किया जाता है, जो कि एक बहुत ही घटिआ कार्रवाई समझी जा सकती है। जो लोग सोशल मीडिआ को शस्त्र बना कर आज आम लोगों के मस्तिष्क में नफ़रत की बारूद भरने की कोशिश में है उन को किसी भी धर्म और देश से कोई लेना देना नहीं।असल में ऐसे लोगों का तो कोई धर्म होता भी नहीं, वह लोग तो सिर्फ़ अपनी ऐशो आराम भरी जिंदगी के सुरूर में अपने हुक्मरानों को प्रसन्न करके बख़्शिशें प्राप्त करते हैं।
सोशल मीडिआ का हिस्सा बने समूह भारतीयों को ताकीद है कि सोशल मीडिआ का वैध और सार्थक उपयोग कर अपना और देश का भला करने में योगदान डालें. कभी भी कोई निर्णय सिर्फ़ चंद बिन्हां सिर पैर की तस्वीरें अथवा ख़बरों से नहीं किया जा सकता। समाज प्रतिद्वंदी अनसर की ओर से सोशल मीडिआ के ऊपर फैलाये जा रहे शैतानी छड़यंतर से बाहर निकलें। सोशल मीडिआ बुरा अथवा गलत नहीं, गलत है तो सिर्फ़ इस की दुर्वरतों कर रहे लोग। सोशल मीडिया के वैध प्रयोग से जहाँ हम अपनी जानकारी में अधिक वृद्धि करते हैं, वहीं इस से अपनी कामयाबी और तरक्की को भी चार चाँद लगा सकते हैं. आएं हम-आप इस बात के प्रति सुचेत हों कि सोशल मीडिआ के ऊपर आम लोगों को किये जा रहे गुंमराहकुंन प्रचार को नकारते हुए अपना पारस्परिक प्यार और एकता बना के रखें और इनसानीअत प्रतिद्वंदी ताक़तों को उन के मकसद में नाकाम करें। अपने महान देश भारत को कामयाबी की बुलंदियाँ पर ले के जायें।