सोशल मीडिया सैल्ल, देश और समाज प्रतिद्वंदी संगठनों पर दृष्टि रखेगा

chkमौजूदा दौर सोशल मीडिया का है। देश और समाज विरोधी ताक़त सोशल मीडिया को शस्त्र बना कर इस पलेटफारम को देश और समाज के विरोध में इस्तेमाल करती हैं। इस पर नकेल डालने और ऐसे लोगों की पहचान करने के लिए पुलिस ने एक अलग से सोशल मीडिया सैल्ल का गठन किया है। यह सैल देश और समाज में विरोध दहकाने वाले गरुप्प पर दृष्टि रखेगा। मिली जानकारी के के अनुसार पुलिस ने कई ऐसे सोशल मीडिया ग्रुपों की पहचान की है। यह गरुप्प युवकों को बहकाते हैं। पुलिस अब इस पर दृष्टि भी रख रही है। पुलिस का मकसद है कि ऐसे मीडिया गरुप्प में सरगरम लोगों की पहचान करना और आतंकवादी अथवा फिर कोई बड़ी वारदात होने पर इन का पूरा डाटा तैयार रहे और इन को दबोचा जा सके। उल्लेख्यनिए है कि फेसबुक्क, टवीटर जैसे सोशल मीडिया पलेटफ़ारम का इस्तेमाल कर दूसरे देशों में बैठे देश विरोधी अपनी गतीविधयां चला रहे हैं। पिछले वर्ष अप्रैल महीने में काऊंटर इंटेलीजयंस ने पाकिस्तान के आईऐसआई का एक ऐसे ही गरुप्प का पर्दा फाश किया था जो गड़बड़ी फ़ैलाने की फिराक में था।
आईऐसआई के लिए काम करने वालों ने सोशल मीडिया के द्वारा युवकों को जोड़ा और इस्तेमाल किया। हालांकि पकड़े गये गरुप्प ने केवल दीवारों पर रेफरैंडम 2020 लिखा था और वारदात के लिए तैयारी कर रहे थे, पकड़े गए थे। बंगा इलाके के गांव खानखाना के 4 युवक इस गरुप्प में समाविष्ट होने के खुलासे से पुलिस प्रशासन हिल गया था। पुलिस अधिकारियों का मानना है कि समारटफोन की पहुँच हर गांव के युवकों पर होना और सोशल मीडिया पर सरगर्मी ने देश प्रतिद्वंदी ताक़तों के रास्ते को आसान कर दिया है। पुलिस सूत्र बताते हैं कि देश प्रतिद्वंदी ताक़त सोशल मीडिया के सहारे इन युवकों की पहचान कर डालता हैं और उन का इस्तेमाल देश और समाज के ख़िलाफ़ के लिए करते हैं। सोशल मीडिया पर भड़काऊ पोसट शेयर करते हैं।इस पर सहमति जताना वाले का गरुप्प बना कर उन में से युवकों को अपने जाल में फँसाने का काम शुरू हो जाता है। उन की भावनाओं को दहका कर अपना से जोड़ा जाता है, इस के लिए उन को आर्थिक मदद का लालच भी दिया जाता है।