हिंसा कभी किसी मसले का समाधान नहीं हो सकती

hinsaजहां विशव का एक बड़ा हिस्सा आतंकवाद की मार झेल रहा है, वहीं यह कहना गलत नहीं कि हिंसा कभी किसी मसले का समाधान नहीं , बलकि इनसानीअत के फूल प्यार की फुलवारी में खिलते हैं. कोई भी धर्म और सभ्यता हिंसा का पाठ नहीं पड़ाती। किसी भी सोच अथवा विचार का बढ़ना फूलना उसके आसपास के माहौल पर निरभर करता है। आतंकवाद मानवता को घुण के माफ़िक खा रहा है। अगर असल अर्थों में देखा जाये तो आतंकवाद आज के युग में एक विचारधारा बन चुका है, किन्तु कुछ लोगों के लिए यह मजहब बन चुका है। दुनिया का शायद ही कोई ऐसा देश होगा, जिस को कभी न कभी आतंकवाद नामी अजगर ने डसा न हो। इस तरह भारत लम्बे समय तक आतंकवाद का शिकार रहा। आतंकवाद की यह नामुराद बीमारी आज भी भारत के किसी न किसी हिस्से में अपना सर निकाल कर खड़ी हो जाती है। इस सब के बावजूद आज के पंजाब को देख कर कोई यह नहीं कह सकता कि आतंकवाद और दहिशतगरदी पंजाब का द्वितीय नाम था। ‘ 84 का दौर पंजाब वासियां के लिए काली अंधेरी रात के समान है। आज की पीढ़ी इसका अनुमान भी नहीं लगा सकती। यह वह समय था जब सूर्य छिपने से कितना समय पहले ही दूकानें बंद हो जाती थी और बजार सुने, किन्तु लोगों की सोच और दृड़ इरादे ने दहिशतगरदी के उस माहौल को अपने आंगन से दूर फेंक दिया. तरन तारन के बाशिंदे मनजीत सिंह ढिल्लों के अनुसार पंजाब ने ‘ 84 के दौर के पश्चात बहुत तरक्की की। अमन शांति के पश्चात पंजाबियों के व्यापार में वृद्धि हुई. पारस्परिक सांझ और मजबूत हुईं और आज की तारीख़ में पंजाब एक प्रोन्नत और तरक्की की ओर बढ़ रहा है, जहाँ सब धर्मों के लोग घुल मिल कर रहते हैं और कोई पारस्परिक मत्तभेद नहीं। जिकरयोग है कि पंजाब का सरहद्दी ज़िला तरन तारन काले दिनों के दौरान आतंकवाद का गढ़ माना जाता था, किन्तु अब वह समय नहीं रहा। अब लोग बेखौफ हो कर जिंदगी का आनंद लेते हैं। किसी समय दहिशतगरदों के इशारों पर चलने वाला शहर तरन तारन, आज आधुनिकता की मिसाल बन रहा है। गगनचुंबी इमारतें और मॉल इसकी कामयाबी की दास्तान बयान करते हैं। सथानक नागरिक नवजोत सिंह के अनुसार ‘ 84 के समय के अनुसार वह अपनी दूकानें 4 बजे बंद कर देते थे, जबकि अब वही बजार देर रात 9 बजे तक खुलते हैं। पंजाब में विदेशी पूँजी का निवेश लगातार बढ़ रहा है। आधुनिक किस्म के रिहायशी मकान और व्यापारिक संस्था हौंद में आ रहे हैं। खेतीबाड़ी के अलावा व्यापारिक और इंडसटरी में पंजाब आगे बढ़ रहा है। यह कहना गलत नहीं होगा कि आज का पंजाब, भारत का सब से अधिक धन कमाने वाला राज्य है, किन्तु इसके बावजूद विदेशों से अपने ठोस रवैये से पंजाब को देखने वाले पंजाब को अप्रतिष्ठित करने की कोशिशों में लगे हैं। पंजाब की पुरानी दहशत की तस्वीर को दोबारा विदेशों में बसे भाईचारे को दिखाने की कोशिश की जा रही है। जिस से इस सहानुभूति को अपने सवारथ की भरपाई का शस्त्र बनाया जा सके, किन्तु पंजाब के लोग उन के इस एजंडे को दोबारा सफल नहीं होने देंगे।

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