ਮੋਦੀ ਦੇ ਡਿਜੀਟਲ ਭਾਰਤ ਦੀ ਖੌਫਨਾਕ ਤਸਵੀਰ II 17 ਸਾਲ ਦੇ ਪੁੱਤ ਨੇ ਸਾਈਕਲ ਤੇ ਲੱਦ ਕੇ ਜੰਗਲ ਚ ਦਫਨਾਈ ਮਾਂ ਦੀ ਲਾਸ਼

ਮੋਦੀ ਦੇ ਡਿਜੀਟਲ ਭਾਰਤ ਦੀ ਖੌਫਨਾਕ ਤਸਵੀਰ II ਸਾਈਕਲ ਤੇ ਲੱਦ ਕੇ ਜੰਗਲ ਚ ਦਫਨਾਈ ਮਾਂ ਦੀ ਲਾਸ਼

जहां के बलांगीर में कुछ दिन पहले देश के प्रधानमंत्री मौजूद थे इसलिए वो ख़बरों का केंद्र था. लेकिन अगले दिन इसी केंद्र से 4 घंटे की दूरी पर करपाबहल गांव में एक ऐसी घटना घटी जिसने हमारे आस-पास की सबसे घटिया और शर्मनाक प्रथा को सामने लाकर रख दिया. करपाबहल गांव में बुधवार की दोपहर 17 साल का एक लड़कासाइकिल को एक हाथ गद्दी पर रखे और दूसरा हैंडल पर रखे चला जा रहा था. साइकिल के कैरियर पर कुछ बंधा हुआ था. एक इंसानी शरीर मालूम दे रहा था. आस पास के लोगों ने पूछा कि ये कौन है तो लड़के ने धीमी आवाज़ में कहा, “मेरी मां.” 17 साल का सरोज. करपाबहल गांव में रहता है. ये उसका ननिहाल है. बाप सुन्दरगढ़ जिले से था. दस साल पहले मर गया था. उसकी मौत के बाद सरोज की मां जानकी उसे लेकर अपने मायके में रहने लगी.बुधवार को जानकी पानी लाने गई थी और वहीं गिर पड़ी. इसके बाद उनकी मौत हो गई. अंतिम क्रिया के लिए जानकी का मरा हुआ शरीर श्मशान घाट ले जाया जाना था. लेकिन किसी ने भी सरोज की मदद नहीं की. क्यूंकि सरोज और उसकी मां जानकी और उसका पूरा परिवार कथित नीची जाति का था. को भी तैयार न देख सरोज ने मां की लाश को ऊपर से नीचे तक एक चादर में लपेटा, उसे अपनी साइकिल के कैरियर में आटे की बोरी या गैस सिलिंडर सा बांधा. (पता नहीं उसने इससे पहले कभी आटे की इतनी भारी बोरी या सिलिंडर कभी बांधा होगा भी नहीं. हालांकि इस विकासशील देश के कितने ही काग़ज़ों पर कितने ही सरोजों ने गैस सिलिंडर से निकलती आग पर पानी गरम कर के नहाना भी शुरू कर दिया है.) अपनी मां की लाश को अपनी साइकिल के कैरियर पर बांधकर वो लगभग 5 किलोमीटर चला और जाकर जंगल में उसे दफ़न कर दिया.कहानी यहीं ख़त्म हो गई. ऐसे सरोजों की कहानी यहीं ख़त्म होती रही है. जानकी मर जाती है और ऊंची जाति वाले उसे छूने से मना कर देते हैं. फिर एक सरोज आता है, उसे कैरियर पर बांधता है और जाकर जंगल की मिट्टी में दबा आता है. 19 साल से प्रदेश की गद्दी पर बैठे नवीन पटनायक जब 26 जनवरी को झंडा फहराएंगे तो किसी स्कूल में गाना भी बजेगा – “मेरे देश की धरती सोना उगले, उगले हीरे मोती… मेरे देश की धरती…”