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अब पंजाब के लोग जागरूक हैं और हर भय से परे हैं  – चावला

लक्ष्मीकांत चावला

लक्ष्मीकांत चावला

लक्ष्मीकांत चावला 15 साल तक विधायक रहे हैं, जिसमें से उन्होंने 5 साल तक स्वास्थ्य मंत्री के रूप में भी काम किया है। उन्होंने खुलासा किया कि पंजाब के काला दिन 1 9 84 में शुरू हुए , जो एक दशक तक चले । उन्होंने लोगों को स्पष्ट किया कि सरकार की सुरक्षा के बाद पंजाब  आतंकवाद के दिनों से बाहर निकलने में कामयाब रहा । श्रीमती चावला भाजपा के वरिष्ठ और सबसे बड़े नेता हैं। उनके अनुसार, कुछ लोग पंजाब में शांति समुदाय को तोड़ने की कोशिश कर रहे हैं। पंजाब के हर धार्मिक लोग शांति से रह रहे हैं। पंजाब में हिंदू, मुस्लिम, सिख और ईसाइयों के बीच  कोई अंतर नहीं है। जैसे की हिंदुओं के लिए गुरुद्वारा आदरणीय हैं, उसीतरहां  सिख समुदाय हिंदू मंदिरों को श्रद्धा के साथ  देखते हैं । गुरु ग्रंथ साहिब में समानता का  संदेश  है। कुछ लोग अपनी निजी महत्वाकांक्षा के लिए पंजाब की बलि देना चाहते हैं। जो लोग विदेशों  में बैठे सिखों को धर्म के नाम पर विभाजित करते हैं और इन्हे  वे आर्थिक रूप से कमजोर और गरीब कहते हैं, लेकिन उन्हें नहीं पता है कि पंजाब में कोई भूख नहीं सोता  । इसमें कोई संदेह नहीं है कि प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी चाहते हैं कि भारत के प्रत्येक नागरिक को उसके सिर पर एक छत मिले। यह महत्वपूर्ण है कि पंजाब के गुरुद्वारों और मंदिरों में लंगर की सेवा हर किसी के लिए सहायता और ज़रूरतों के लिए भोजन भी प्रदान करती है। भारत के अन्य राज्यों की तरह, भूख कभी पंजाब में नहीं फैलती , न ही किसी सर्दी, सर्दियों या सर्दियों के कारण किसी की मृत्यु की खबर  सुनाई गई है। यह एक बड़ी बात है कि पंजाब इन सभी प्रतिकूल परिस्थितियों  से बाहर  है। पंजाब ने बहुत बुरे दिन देखें  हैं परे हैं, पंजाब को बहुत नुकसान हुआ है ,नरसंहार हुआ, महिलाऐं  विधवा हो गई, कई गांवों को खाली किया गया । यह 1 9 84 से 1 99 2 तक हुआ था, लेकिन सुरक्षा बलों ने यह सब साधारण पंजाबियों की सहायता से हासिल किया और पंजाब की शांति को हमेशा के लिए सुरक्षित कर  दिया। उन्होंने आगे कहा कि पंजाब के काले  दिनों के दौरान विदेशों से पैसा एकत्र किया गया था। कई लोगों द्वारा आतंकवाद के नाम पर धन इकट्ठा किया गया था और बहुत से आतंकवाद विरोधी (आतंकवाद) पर आश्रय किया गया था और विदेशों में बड़ी वित्तीय सहायता प्राप्त हुई थी जो लोग भारत के खिलाफ विदेशों में बोलते हैं, वे पंजाब के भले के बारे में नहीं सोच सकते। अधिकारों का लोकतंत्र सब पर लागू होता है, और  छूट विचारों को रखने के लिए है, लेकिन लोकतंत्र को अपनी मातृभूमि के खिलाफ बोलने के लिए नहीं है। अगर देशवासी को कोई नीति या कानून पसंद नहीं है, तो उनके खिलाफ आवाज उठाई जा सकती है, लेकिन देश को विभाजित करने की बात करना देशद्रोह है। खालिस्तान की मांग कुछ स्वार्थी लोगों की  हैं, जो देश को कमजोर करना चाहते हैं और ऐसे लोग भारत के ही नहीं बल्की  पंजाब के भी  दुश्मन हैं । पंजाबी दुनिया के हर कोने में कामयाबी के शिखर को चुम रहा है। इन कटरपंथिओं से  विचारों को साझा करने का प्रयास जरूरी है  जो भारत के खिलाफ जहर उगल रहे हैं उन  लोगों को दर्पण दिखाने के लिए  कि पंजाब एक समृद्ध राज्य है और यदि वे इसका सबूत चाहते हैं, तो पंजाब जाएं और देखें कि पंजाब कैसे प्रगति कर रहा है। बढ़ रहा है।