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पंजाबी युवा अब अधिक जागरूक

punjabiपूर्व सरकारी कार्यकर्ता नरिंदर पाल सिंह पलासौर, जो कि आतंकवाद विरोधी और नशा विरोधी मुहिंम पंजाब में चला रहे हैं, ने 1984 के हालातों को बयाँ करते हुए कहा कि, उस समय के हालातों में बहुत लोगों का मकसद पैसा बनाना था और ज्यादातर पिसतौल की नोक पर अपनी ताकत का इज़हार करने में लग गए. पंजाब में बिनां किसी लक्षय के आतंकवाद फैल गया. सिख संगठन जो कोई लक्षय लेकर चले थे, जिन में जल्द ही अति अधिक आतम विशवास पैदा हो गया, जिस कारन बहुत सारे युवा आतंकवाद में धस्स गए, किन्तु 1984 के पछ्चात पंजाब में बदलाव आया. जो लहर सिआसी मुद्दों को ले कर शुरू हुई थी, उस को धारमिक रूपरेखा में बदल दिया गया. जिस के उपरांत पंजाब में बड़ी गिनती में कतलेआम हुआ. जिस का अधिक मुनाफा सिआसी लोगों को मिला. इस दौरान अलग राज्य की मांग भी शुरू हो गई, जिसदी शुरूआत कपूरी मोरचा से हुई और इस दौरान सिआसी मसला, आतंकवाद मसला बन गया. बतानेयोग है कि पंजाब के युवा अब अधिक जागरूक हैं और किसी भी पक्ष से किसी की बात सुनने वाले नहीं, जैसे कि उस समय के युवा आतंकवाद में दाखल हो कर लूटपाट और फिरौती जैसे घटिआ कामों को अंजाम देते रहे. उन्होंने कहा कि, उस समय के गरम सोच के लोग पंजाब से बाहर प्रवास कर गए और पुराने पंजाब को अब के पंजाब साथ मिलाने की कोशिश में हैं. पंजाब का युवा अपने आप को विशव भाईचारे में मिश्रित देखना चाहता है. विशव सत्तर पर अपनी सथापना करनी चाहता है और आज का युवा छोटे मोटे मसलों में उलझना नहीं चाहता और ना ही धरम के नाम पर कोई प्रापोगँडा करने में विशवास रखता है. उन्होंने कहा कि, हिंसा किसी भी बात को रखने का कोई वाजिब हथिआर नहीं है. हिंसा के साथ जो जखम मिलते हैं, वह लंबे समय तक हरे रहते हैं. हिंसा का हिस्सा बनने वाले लंबे समय तक इसका दुख झेलते हैं. अजादी का मतलब अपने मिशन की प्रापती करना है. अगर हमें कट्टर होना ही है तो अपनी सोच को बदलें और अपनी कटरपंथी पंजाब के विकास की राह में लगाएं. पंजाब का युवा अब पंजाब के अर्थ शासतर को समझता है और वह सुरते हाल पंजाब को विकसित करने के लिए अपना योगदान देने के लिए ततपर है.

नोट : किसी भी व्यक्ति विशेश के ब्यान अथवा विचारों से संपादक की सहमति होनी जरूरी नहीं.