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पंजाब में ना कभी अलगाववाद फैला है और ना फैलेगा – हरजिंदर सिंह

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पूर्व कांग्रेस के विधायक हरजंदर सिंह ठाकरदार ने 20 साल पहले अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत की थी, जब कई राजनीतिक लोग अपनी पहचान सार्वजनिक करने से डरते थे, क्योंकि वे आंतकवाद का शिकार नहीं होना चाहते थे । वह एक बहुत ही मुश्किल समय था खुद को कांग्रेस नेता कहना । बहुत से लोगों ने पंजाब छोड़ दिया था, लेकिन हम में से कुछ और हमारे जैसे आतंकवाद से निडर, पंजाब में रह रहे थे, आतंकवाद के खिलाफ लड़े भी । उन्होंने कहा कि वह स्वर्ण मंदिर से 100 मीटर दूर रहते थे। इस अवधि के दौरान, एक परिवार ने उसकी मदद करना शुरू कर दिया, जिनका छोटा बेटा कतल कर दिया गया और लड़की को बेरहमी से बलात्कार का शिकार बनाइए गया। उन्होंने कहा कि ऐसे मुश्किल दौरों के दौरान राजनीतिक दल गायब हो गए और केवल एक कांग्रेस थी जो आतंकवाद से लड़ रही थी और कांग्रेस ने पंजाब में शांति बहाल की। उन्होंने कहा कि कश्मीर सालों से जल रहा है लेकिन कोई उपाए नहीं किया जा सका , लेकिन पंजाब में सरकार ने आतंकवाद को नष्ट करने का काम किया है और विकास बहाल करवाने की करवाई बखूबी निभाई । पुराने दिनों को स्मरण करते हुए उन्होंने कहा कि मंदिरों, गुरुद्वारों,में सिगरेट के टुकड़े और गायों का मास फेंका गया जिससे उन्हें लोगों के बीच अलगाववाद फैलाने के लिए मजबूर किया जा सके। ठेकेदार के अनुसार, रंगभेद का कोई प्रसार नहीं हुआ है और पंजाब में अलगाववाद फैले गा भी नहीं । पंजाब में सांप्रदायिक एकता का उल्लंघन कभी नहीं हुआ। आतंकवाद के अंत के बाद, पंजाब प्रगति की ऊंचाई तक पहुंच गया है। उन्नत प्रगति के उच्च मानदंडों को छू रहा है । पाकिस्तान की अंतरराष्ट्रीय सीमा के कारण, पंजाब मैं गैर क़ानूनी माइग्रेशन खतरनाक साबित हो रहा है। विदेशों में बैठे अतिवादियों ने रंगभेद , अलगाववाद फैलाने के प्रयास शुरू किये हैं । पंजाब की शांति को ग्रहण लगाना उनका व्यवसाय है। पंथ को खतरे में डालते हुए, पंजाब को अलग करने की यां विभाजन की योजनाएं सफल नहीं होंगी पंजाब के लोग जानते हैं कि विदेशी शक्तियां उनके पंजाबीवाद से प्यार नहीं करती हैं यह उनकी सोच का शिछोरा पन है की सिर्फ सिख पंजाब में रह रहे हैं जबकि सिख पुरे भारत में रहते हैं और पुरे भारत पर सिखों का बराबर का अधिकार है । सिख गुरुओं दवारा आपसी एकता और इंसानियत के दिए गए सांप्रदायिक सन्देश को भूलकर सिख कट्टरपंथी अपनी स्वार्थ की बात कर रहे हैं। पंजाब के लोग इस सौदे को नहीं खरीदेंगे क्योंकि पंजाब अब और अधिक सतर्क और बुद्धिमान बन गया है और इसके पंजाबी सांप्रदायिक नुकसान किसी भी कीमत पर नहीं होने देंगे।