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पंजाब विरोधी बयान प्रापोगँडा फ़ैलाने के लिए दिए जाते हैं – नवजोत सिंह

punjabआतंकवाद के दिनों के दौरान पंजाब का सभ से अधिक प्रभावित होने वाला शहर तरन तारन रहा, किन्तु उसके पश्चात भी आज तरन तारन तरक्की के सिखर पर है और वहां के लोग बेख़ौफ़ और आम जिन्दगी बसर कर रहें हैं. आतंकवाद के दिनों के समय दुकानें शाम को 4-5 दे बीच बंद हो जातीं थीं और अगर शहर में कोई आतंकवादी मारा जाता था तो शहर 5-10 दिनों के लिए बंद हो जाता था, जिस दौरान लोग अगले आतंकवादी हमले की सम्भावना के कारन सहमे रहते थे. यह खुलासा तरन तारन के बाशिंदे नवजोत सिंह ने किया. उन्होंने कहा कि, इस सभ के बावजूद आज तरन तारन में बड़ी दुकानें, आधुनिक मॉल, शॉपिंग पलाज़ा आदि खुल चुकें हैं और आम जनजीवन बहाल हो चूका है. सिख अलगाववादी और पंजाब विरोधी बयान के बारे में उन्होंने सपशट किया कि, ऐसी घटनाएं पंजाब में दोबारा प्रपोगंडा फैलाने के लिए की जा रहीं हैं, जिसका मुख्य अधार मोटे फंड इकठे करना है और इसको निजी सवारथ कहना बेहतर होगा। पंजाब की शांती को भंग करने की दोबारा कोशिशें की जा रहीं हैं, किन्तु हम इन अलगाववादिओं का मुंहतोड़ उत्तर देंगें. पंजाब का मौजूदा नौजवान दोबारा पंजाब में आतंकवाद नहीं चाहता, बल्कि अच्छी शिक्षा, वपार और विदेशों में अपने पैर जमाने चाहता है. पंजाब की महानता अंतरराष्ट्री सत्तर पर पहचानी जा चुकी है. सरहद्दी खेत्रों के साथ के गाओं में खुशहाली आई है. सरहद्दी खेत्रों में रहने वाले परिवारों के बच्चे भी अच्छी शिक्षा प्राप्त कर ऊँचे स्थानों को प्राप्त करना चाहतें हैं, जबकि यह सभ आतंकवाद के समय नहीं था. उन्होंने कहा कि, बीते समय में पंजाब में फैले आतंकवाद ने पंजाब को झंझोड़ के रख दिया था, जो अब दोबारा नहीं होने दिया जायेगा.

पंजाब के टरांसपोटर सुबेग संधू ने कहा कि, 1976 के पश्चात पंजाब में हो रही तरक्की को नुक्सान होना शुरू हो चूका था और यह आतंकवाद के खतम होने तक जारी रहा. उन्होंने कहा कि, पंजाब से बाहर निकल कर सम्मान महसूस होता था, जब हमें सरदार जी कह के संबोधन किया जाता था. फिर एक समय ऐसा आया जब लोग भय खाने लगे. आतंकवाद के बड़े हमलों के कारन वपार बड़े पैमाने पर प्रभावित हुआ. उन्होंने कहा कि, विदेशों में बैठ के पंजाब में अलगाववाद के बयान देना अमानवी है. पंजाब का युवा अब इन बातों में आने वाला नहीं. बीते समय दौरान युवा गुमराह हो गया था, जिसका नुकसान भी पंजाब को झेलना पड़ा, क्योंकि जब कोई पुलिस वाला मरता था तो वह भी हमारा पंजाबी था और जब कोई आतंकवादी मरता था तो वह भी हम पंजाबिओं में ही से एक था. कहने का अर्थ है कि नुकसान तो पंजाब का ही हो रहा था और विदेशी ताकतों के साथ मिल पंजाब की अवाम को गुँमराह करने वाले तमाशबीन निजी सवारथ के लिए इस काम को अंजाम दे रहे थे. उन्होंने कहा कि, आज पंजाब को देखो, हमारे बच्चे कितनी आजादी के साथ रह रहे हैं. उच्च शिक्षा प्रापत करने के लिए विदेशों में जाते हैं और पंजाब की तरक्की में योगदान डालते हैं. हिन्दु, सिख़, मुसलिम, क्रिस्चन आपसी सदभावना के साथ रहतें हैं.

तरन तारन के एक और बाशिंदे मनजीत सिंह ढिलों ने उस समय के हालातों को बयान करते हुए कहा कि, हरिमंदिर साहिब के हमले के उपरांत युवाओं में रोष था और उन में से कई युवाओं ने हथिआर उठा लिए, जिस कारन शाम के 5 बजे के पश्चात पंजाब की सड़कों पर से जिंदगी खतम हो चुकी थी. हर आम और खास अपने आप को अपने घरों में बंद कर लेता था. लोग बाहर निकलने से डरते थे. व्यपार खतम हो चुका था, कह सकतें हैं कि पंजाब में जीवन बिलकुल खतम हो चुका था. आतंकवाद के ख़तम होने के उपरांत आज दुकानें देर शाम तक खुलतीं हैं और देर रात तक आवाजाई सड़कों पर बहाल है. इसके बावजूद कई सिख अलगाववादी पंजाब के माहौल को खराब करने का बीड़ा उठा के बैठे हैं. उन्होंने कहा कि, पंजाब खेतीबाड़ी के ऊपर निरभर राज्य है, और अकेली खेती से राज्य को चलाना कठिन ही नहीं बलकि नामुमकिन है.

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