पाकिस्तान विश्व में सब से बड़ा भेदभाव वाला देश

pkविश्व सिख भाईचारे को करतारपुर कारीडार का सपना दिखा पाकिस्तान का दर्जा ऊँचा उठाने वाले इमरान खान भारत को सीख देने की बात कर रहे हैं। उन्होंने एक बयान में कहा कि, भारत के प्रधान मंत्री नरेंदर मोदी को कम गिनती से रवैया करने का तरीका सिखाएँगे, जबकि पाकिस्तान विश्व में सब से बड़ा वर्णभेद देश है। जब पाकिस्तान का भारत से बँटवारा हुआ तो उस समय की माँग इस्लाम धर्म पर अधारित थी. इमरान खान जो क्रिकेट के मैदान में भी कई तरह के विवादों से घिरे रहे हैं, वह आज मोदी को अहिमदिया, कृसचन और सिखों से रवैया करने का गुण सिखाने की बात कर रहे हैं. पाकिस्तान में एक धर्म से सम्बन्धित दो वर्ग शिया-सुन्नी को इकट्ठे करने में नाकामयाब रहे इमरान विश्व को एकता की बात सिखा रहे हैं. तीन विवाह करवाने वाला जिस को अपनी जिम्मेवारी का भी एहसास नहीं, जो धर्म को अधिमान ज्यादा देता है और मानवता को कम, वह एकता का संदेशा कैसे दे सकता है ? इस में कोई संदिग्धता नहीं कि इमरान 5 नमाजी है, किन्तु देश और समाज से सम्बन्धित विश्व स्तर पर अन्तर्राष्ट्रीय सभायें छोड़ कर नमाज पढ़ने चले जाना मानवता का सत्कार नहीं। इमरान खान जब मदीना गये तो मदीना की पाक धरती पर उन्होंने अपने पैर जूती उतार कर जमीन पर रखे। किसी सयासतदान का धार्मिक होना गलत नहीं, किन्तु धार्मिक भावनाओं के साथ साथ मानवता भी लाज़िमी है, जो इंसान को सामाजिक धर्म की तरफ़ ले जाती है। क्या इमरान खान इन संपूर्ण धार्मिक गतिविदिओं से तटस्थ लीडर साबित हुआ है ? शायद नहीं पाकिस्तान में कुफ़र अधिनियम का बोलबाला है। कुफ़र अधिनियम तहत अथवा शर्य तहत कम गिनती को दबाव कर रखना और उन पर मृत्यु का डर बनाया रखना वहां का नियम है। जिसके ख़िलाफ़ पाकिसतानी अदालतें भी नहीं जा पाते। इमरान खान भी इस अधिनियम को बदलण में कोई अतीव रुच्ची नहीं दिखलाते। आसिया बीबी भी इस अधिनियम तहत भेदभाव का शिकार हुई थी. पाकिस्तान की अदालतें भी धर्म से जुड़ीं सख्शियतों को सजा सुनाने से कतराती हैं। पाकिस्तान के 26वें गवर्नर और लिबरल पार्टी का लीडर सलमान तसीर का अपने संरक्षण करमी की ओर से कत्ल किया गया था, क्युंकि सलमान ने कुफ़र अधिनियम को बदलने के लिए आवाज बुलंद की थी. पाकिस्तान में पारस्परिक सदभावना का माहौल इस लिए नहीं है, क्युंकि वहां की लीडर्शिप्प पारस्परिक सदभावना का विचार नहीं रखती। गैर मुसलिम नागरिक पाकिस्तान में किसी भी मुख्य पदनाम पर नहीं लगाये जाते। पाकिस्तान के इतिहास में गैर मुसलिम मुख्य नयांधीश के पद पर नहीं लगाया गया। पाकिस्तान के इतिहास में गैर मुसलिम मुख्य नयांधीश के पदनाम पर नहीं लगाया गया। पाकिस्तान अपना धर्म पक्षी रवैये पर हमेशां ही अबाध्य रहा है। पाकिस्तान असल में एक मुसलिम देश है, जो बाक़ी धर्मों को सम्मान देने की बात तो दूर वर्णभेद और वर्गों को भी खत्म करने में पूर रूप पर अक्षम रहा है।