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लोगों की भावनाओं का लाभ उठाने वाले अलगाववाद की चिंगारी को हवा देते हैं – गुरबचन सिंह

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विदेशों में सिख समुदाय से जुड़े कुछ लोग नफरत को बेचने के लिए कड़ी मेहनत कर रहे हैं। लोगों की भावनाओं का फायदा उठाते हुए अलगाववाद की चिंगारी जलाई जा रही है।  इन विचारों को शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक समिति के सचिव गुरबचन सिंह बचन ने व्यक्त किया ।  उन्होंने कहा कि खलिस्तान की बात करना एक अपरंपरागत बातचीत एवं सोच है। उन्होंने कहा कि कुछ लोगों को राज्य में विदेशी भूमि से वित्तीय समर्थन के सहारे पंजाब को बदनाम करने और खलिस्तान के मुद्दे को उकसाने की जिम्मेदारी दी गई है।  हमें इन लोगों के उद्देश्य और सोच को समझना होगा उन्होंने कहा कि खलिस्तान बनाने से पहले हमें ख़लास होना चाहिए। हमें उन लोगों की जरूरत है जिनके व्यवहार में उच्च सत्तर की सोच है । पाकिस्तान का एक उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा, “यह कहना जरूरी नहीं है कि पाकिस्तान भारत से अलग है।” पाकिस्तान में विकास दर नही के समान है और इसका अर्थ बहुत ही कुटिल है। पंजाब के विभिन्न हिस्सों से विदेशों में बैठे गर्म ख़याली और कटरपंथी लोग पंजाब के अंदर अलगाववाद की बात कर रहे हैं , गुरबचन सिंह ने कहा कि यह एक भ्राम फैलाने वाली बात है और लोगों को अवैध रूप से भड़काएया जा रहा है। उन्होंने यह स्पष्ट किया कि 1984 के काले दिन के दौरान वह पंजाब में थे और इस समय भी पंजाब में हिंदू और सिख समुदाय शांतिपूर्वक जी रहे थे। भारत में हिंदू सिखों में कहीं कोई दंग नहीं हुए , क्योंकि उनके बीच सांप्रदायिक सौहार्द और तालमेल हमेशा से रहा है। 1 9 84 के बाद, राज्य में बड़े पैमाने पर आर्थिक विकास हुआ है। उन्होंने कहा कि पहला दुख़द हादसा पंजाब के साथ 1 9 47 में हुआ, जब पंजाब को पाकिस्तान में बांटा गया था, और फिर 1 9 66 में पंजाब को राज्यों को समायोजित करने के लिए पुनर्वितरित किया गया। इसका एक बड़ा हिस्सा हिमाचल प्रदेश में चला गया।