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सिख तवारीख, सिखों को देने से पाकि ने किया इनकार

sikhsसिख समुदाय के लिए पाकिस्तान सरकार का पुरातन तवारीख के लिए दिया गया फैसला कष्टदायक रहा. पाकिस्तान सरकार ने पुरातन हाथ से लिखे गुरू ग्रन्थ साहिब जी का सरूप और सिख इतिहास से जुड़ी, बहुत बड़ी गिनती में किताबों को सिख समुदाय को देने से इनकार कर दिया. पाकिस्तान सरकार ने ना सिरफ पाकिस्तानी सिखों को इनकार किया, बलकि अंतरराष्ट्री सिख संस्था को भी साफ इनकार कर दिया. श्रोमणी गुरदुआरा प्रबंधक कमेटी के दो सदस्य वाले हाथ से लिखे और छपाई किये गुरू ग्रन्थ साहिब जी के सरूप पंजाब पबलिक लाइब्रेरी लाहौर में मौजूद हैं, जिन की देख-रेख सिख नियमों के तहत ना तो पाकिस्तान गुरदुआरा प्रबंधक कमेटी कर रही है और ना ही इस से जुड़ी संस्था इवैकिऊ टरसट प्रापरटी बोरड इस के प्रती संजीदा है. रिपोरट में कहा गया है कि दयाल सिंह लाइब्रेरी लाहौर की तरफ से गुरू साहिब का सरूप होने से साफ इनकार कर दिया गया. यह बहुत ही कष्टदायक घटना है, जिस वजह से विशव के सिख समुदाय में नामोशी पसरी है. इस घटना की सख्त निंदा करते हुए पूर्व ऐस जी पी सी सचिव जोगिन्दर सिंह ने इस घटना को धारमिक भावना के साथ खिलवाड़ कहा. उन्होंने कहा कि, पाकिस्तान सरकार को दरिआदिली दिखानी चाहिए थी, जिसके चलते पाकिस्तान के सिखों के इलावा अंतरराष्ट्री सिखों को भी दर्शन करने की इजाजत देनी चाहिए और अधिक वृद्ध सरूप की सेवा करने की देनी चाहिए. श्री गुरू ग्रन्थ साहिब जी को हाजर गुरू समझा जाता है और गुरू के दरशन ना करने देना बेकदरी समझा जायेगा. पाकिस्तान को गुरजीत सिंह ने अपील की कि जलद ऐस जी पी सी की तरफ से अपना वफद पाकिस्तान भेजा जाये, जिस से गुरू साहिब की मरिआदा को बरकरार रखा जा सके. उन्होंने कहा कि, गुरू साहिब के सरूप लाइब्रेरी अथवा म्यूज़ियम से हटा के सथानक गुरदुआरा कमेटी को सौपा जाये, जहां उनकी सिख मर्यादा के तहत संभाला जा सके.